जानिए क्यों है जोधपुर में सिलिकोसिस का इतना कहर?
बाड़मेर पत्रिका. सिलिकोसिस की बीमारी ने बाड़मेर में 697 लोगों को जिंदगी और मौत से जूंझने को मजबूर कर दिया है। जांच करवाने वाले 4896 थे। बढ़ते रोग की वजह खनन और जिप्सम का काम करने वालों की बढ़ती संख्या है। हालांकि यह आंकड़ा जोधपुर के मुकाबले बहुत कम है। प्रदेश में सर्वाधिक सिलिकोसिस रोगी जोधपुर े में 7473 है, यहां 39692 ने जांच करवाई थी। मजदूरों के सांस में तकलीफ और फेफड़ों में हल्का दर्द होते ही पहली आशंका सिलिकोसिस की बन जाती है। एक बार सिलिकोसिस की गिरफ्त में आया मजदूर तिल-तिल कर मरता है और परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने पर पूरा परिवार इस रोग को भुगतता है। बीपीएल घोषित करे राज्य सरकार ने सिलिकोसिस पीडि़तों को बीपीएल घोषित कर इनको मदद का प्रावधान तो किया था लेकिन यह लागू नहीं हो पाया। रोग लगते ही मजदूर परिवार जो सुबह कमाकर शाम खाता है,उसके लिए कुछ ही दिनों में रोटी के लाले पड़ जाते है। इन परिवारों को बीपीएल घोषित करने की दरकार है। यह है स्थितियां पाटोदी का रहने वाला भंवराराम लंबे समय से दवा ले रहा है। एक बेटे की इसी रागे से मृत्यु हो गई। सिलिकोसिस रोग ने पूरे परिवार को द...