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Showing posts from April, 2022

पहले पानी...अब बिजली कटौती...गर्मी में कहीं दम न निकल जाए

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बाड़मेर. नहर में क्लोजर पहले से चल रहा है, इसके कारण शहरी क्षेत्र में पानी का संकट बढ़ चुका है। गांवों का हाल तो इससे भी बुरा है। वहां पानी का भारी किल्लत के बीच अब बिजली की घंटों तक कटौती और अघोषित कटौती गर्मी में आमजन पर भारी पड़ रही है। पहले पानी नहीं मिल रहा है, उस पर बिजली की मार से कहीं लोगों का दम न निकल जाए, इस तरह की स्थिति गांवों में बनती दिख रही है। बिजली के कारण शहरी क्षेत्र के आसपास के एरिया में भी दिन में पता नहीं कितनी बार आपूर्ति गुल हो रही है। बिजली की अघोषित कटौती से आमजन परेशान है। हालांकि अभी नगर पालिका क्षेत्रों में बिजली की 1-2 घंटों तक कटौती की जा रही है। वहीं गांवों में 3-4 घंटे बिजली की कटौती है। लेकिन इस बीच यह अघोषित रूप से कितनी बार गुल हो रही है, यह पीड़ा भीषण गर्मी को झेल रहे लोग ही बता सकते है। शहर में सात दिन में 2 दिन पानी नहर में क्लोजर के बाद बाड़मेर शहर में एकांतरे की बजाय सात दिन में मुश्किल से दो दिन पानी आ रहा है और उसका भी कोई दबाव नहीं। विभाग का दावा नियमित आपूर्ति का यहां पर फैल दिखता है जब हर गली और घर में सात दिनों में कम से कम एक बार पान...

राजी का दूसरा पति था अर्जुन, प्रेमी के साथ मिलकर मौत के घाट उतारा

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बाड़मेर शहर से चार किलोमीटर दूर जसदेर धाम के निकट कालबेलियों के डेरे में पत्नी ने पांच जनों के साथ मिलकर अपने पति को इतना बेरहमी से पीटा कि उसकी मौत हो गई। पुलिस ने पत्नी व पांच अन्य के खिलाफ हत्या व एससीएसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। ग्रामीण थानाधिकारी परबतसिंह ने बताया कि भाचभर निवासी धनाराम निवासी कालबेलिया ने मामला दर्ज कराया कि उसके भाई अर्जुन (22) की पत्नी राजी, मदन गोदारा, जेठाराम, सवाईराम, अणछी व जयपुरिया ने मिलकर बुधवार शाम करीब सात-आठ बजे दरम्यान अर्जुन के साथ जमकर मारपीट की। गंभीर मारपीट से आई अंदरुनी चोटों से उसकी मौत हो गई। प्रार्थी ने रिपोर्ट में बताया कि राजी का मदन व जेठाराम के साथ अवैध संंबंध था, जिस पर अर्जुन को एतराज था। इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच में बुधवार शाम बहस हुई। अस्पताल पहुंचने से पहले मौत अर्जुन पुत्र छोगाराम कालबेलिया मूलत: भाचभर का रहने वाला था और भवन निर्माण में काम आने वाले पत्थरों की घड़ाई का कार्य करता है। कालबेलिया परिवार का अस्थायी डेरा फिलहाल जसदेर धाम के पास है। यहीं पर बुधवार रात अर्जुन के साथ गंभीर मारपीट हुई। हालांकि गंभीर मारपीट स...

जरा ठहरो जिंदगी....बाड़मेर से दूध और खून दोनों आ रहे है...

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महेन्द्र त्रिवेदी बाड़मेर पत्रिका. जन्म लेते ही बच्चे को मां का दूध नहीं मिले तो उसके परिजनों की हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है और दुर्घटना-प्रसव या अन्य अकस्मात जरूरत पर जब खून न मिले तो परिजन मारे-मारे फिरते है तब उनके लिए एक रक्तदाता किसी भगवान से कम नहंीं होता है। इन दोनों में बाड़मेर तो अब मिसाल बन गया है। यहां बच्चे को जन्म देने वाली मां का दूध अब अजमेर तक पहुंच रहा है और रक्तदाताओं का खून सिरोही में अनजाने लोगों को जिंदगी दे रहा है। रक्तदान और माता के दुग्धदान की यह बेमिसाल इबारत बाड़मेर लिख रहा है उन उत्साही लोगों के बूते जो रक्तदान के लिए हर वक्त खड़े नजर आते है । प्यासे मरूधर से जिंदगी को विश्वास पानी के लिए प्यासी मरुधरा अमृत और जिंदगी बांटने में आगे आ गई हैै। बाड़मेर का आंचल मदर मिल्क बैंक एक मिसाल है, जहां से जरूरत के वक्त नवजात मासूमों के लिए अजमेर मेडिकल कॉलेज को मदर मिल्क भेजा गया था। बाड़मेर में आंचल मदर मिल्क बैंक की स्थापना के कुछ समय बाद ही अजमेर मेडिकल कॉलेज से नवजातों के लिए मां के दूध की जरूरत महसूस की गई थी। बाड़मेर का मदर मिल्क इतना सक्षम हो चुका कि उसने य...

शिक्षक खुद बजाए घंटी या बच्चों से करवाएं काम!

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दिलीप दवे बाड़मेर . प्रदेश के सरकारी स्कूलों के शिक्षक खुद घंटी बजाए, विद्यालयों में काम निपटाए या फिर बच्चों से काम करवाए यह स्थिति है। क्योंकि 75 फीसदी विद्यालयों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के पद खाली है। नियमानुसार बच्चों से काम करवाया नहीं जा सकता और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नहीं होने पर शिक्षक कार्य करवाएं तो कैसे यह समस्या आ रही है। शिक्षा विभाग के विद्यालयों में अध्यापन व शैक्षणिक कार्यों के लिए विभिन्न श्रेणी के शिक्षकों के पदों के साथ साथ विभिन्न प्रकार के गैर शैक्षणिक कार्य होते हैं जिसके लिए गैर शैक्षणिक कर्मचारियों की जरूरत होती है। इसमें खेलकूद के लिए शारीरिक शिक्षक, लिपिकीय कार्यों के लिए वरिष्ठ सहायक व कनिष्ठ सहायक, पुस्तकालय के लिए लाइब्रेरियन, प्रयोगशाला के लिए प्रयोगशाला सहायक और स्कूल में अन्य सहायक कार्यों के लिए चतुर्थ श्रेणी सहायक कर्मचारी की जरूरत होती है। जिसका कार्य होता है स्कूल खुलने पर घण्टी बजाने से लेकर सफाई करना, पानी भरना व छुट्टी होने पर स्कूल बंद करना। लेकिन वर्तमान में प्रदेश के शिक्षा विभाग में केवल उच्च माध्यमिक विद्यालयों तक ही ये पद सीमित रह ग...

व्यावसायिक फसलों के उत्पादन पर जोर देने की आवश्यकता: केन्द्रीय कृषि मंत्री

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बाड़मेर ञ्च पत्रिका . परंपरागत खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक कृषि के तौर तरीकों को अपनाने, समन्वित कृषि प्रणाली, व्यावसायिक फसलों के उत्पादन पर जोर देने की आवश्यकता है। साथ ही द्वितीयक कृषि से मूल्य संवर्धन, मार्केङ्क्षटग, प्रसंस्करण, ब्रांङ्क्षडग आदि की जरूरत है, ताकि किसानों की आय बढ़ सके। यह बात केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र ङ्क्षसह तोमर ने वर्चुअल माध्यम से केवीके गुड़ामालानी सहित विभिन्न कृषि विज्ञान केन्द्रों से जुडकर प्रगतिशील कृषकों से संवाद करते हुए कही। आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत किसान भागीदारी प्राथमिकता अभियान के तहत जिला स्तरीय किसान मेले का आयोजन आत्मा बाड़मेर व कृषि विज्ञान केन्द्र, गुड़ामालानी के संयुक्त तत्वावधान में केवीके गुड़ामालानी में आयोजित किया गया। केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्यमंत्री कैलाश चौधरी ने वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कहा कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए हम सभी को मिलकर संयुक्त रूप से प्रयास करने हैं। मुख्य अतिथि महेन्द्र कुमार चौधरी जिला प्रमुख बाड़मेर ने कहा कि बाड़मेर जिले में किसानों के द्वारा किए जा र...

अब निर्मला आसानी से सुन पाएगी अपनों की आवाज

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सिणधरी बाड़मेर . उपखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम छोटे बच्चों के लिए वरदान साबित हो रहा है। लगातार अलग-अलग बीमारियों से ग्रसित बच्चों का राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम तहत जांच के साथ निशुल्क इलाज करवा कर नई ङ्क्षजदगी में आगे बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। बाड़मेर जिले में पहली बार चार वर्षीय बच्ची का कोकलियर इम्प्लांट का सफल ऑपरेशन होने से चार वर्षीय बच्ची निर्मला आसानी से दूसरों की आवाज सुन पाएगी। मुख्य खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. उमेदाराम चौधरी ने बताया कि उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार खंड सिणधरी के आंगनवाड़ी केंद्र पर आरबीएसके टीम द्वारा छोटे बच्चों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। जिसके तहत आंगनवाड़ी केंद्र भीलों का गोल मालपुरा में चिकित्सक बंशीलाल सऊ ने आंगनवाड़ी केंद्र पर निर्मला के स्वास्थ्य प्रशिक्षण जांच की गई जिसमें प्रारंभिक जांच में निर्मला पुत्री सिमरथाराम जो बचपन से आवाज सुन नहीं पा रही थी। जिसकी जांच करके उच्च चिकित्सकों के निर्देशानुसार बच्ची को एमडीएम अस्पताल जोधपुर रेफर किया गया जहां निर्मला का 25 अप्रैल को कोकलियर इम्प्ल...

कृपया धीरे चलो की जगह यहां ठंडी बीयर मिलती है के बोर्ड

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बाड़मेर . शहर के सिणधरी चौराहे से जालोर की ओर से जाने वाले हाइवे पर बने डिवाडरों पर जहां यातायात सम्बधित सूचनाएं, रेडियम आदि लगने थे। उन डिवाइडरों पर दुकानों ,शराब के ठेकों, होटलों, अस्पतालों आदि का प्रचार प्रसार धड्डले से हो रहा है। भ्रमित करने वाले होर्डिंग बोर्ड के कारण कभी भी हादसा हो सकता है। इसके बाद भी जिम्मेदारों की ओर से इन पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। संकेतों का नहीं अता पता हाइवे किनारे व डिवाइडरों पर जहां वाहन धीरे चलाएं, होर्न नहीं बजाए, आगे मोड है, ब्रेकर है, वाहन गति सीमा, अस्पताल, स्कूल, सहित अन्य संकेत होने चाहिए। उन स्थानों पर यहां ठण्ड़ी बीयर मिलती है। इसके अलावा विभिन्न, होटलों, अस्पतालों सहित अन्य दुकानों का प्रचार प्रसार हो रहा है। हादसों को मिल रहा न्योता हाइवे पर लगे विभिन्न प्रकार के होर्डिंग बोर्ड से चालकों का ध्यान भंग होता है। इसके अलावा यातायात संकेतों के लिए लगे बोर्डों पर भी दुकानदार प्रचार प्रसार कर रहे है। डिवाइडरों पर बोर्ड होने के कारण पैदल राहगीरों को रास्ता पार करने में समस्या आती है। समस्या यहां भी शहर के चौहटन चौराहे से जालीपा की ओर...

हमारी सांस्कृतिक विरासत के संवाहक है ओरण

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बाड़मेर. पशु-पक्षियों की शरणस्थली के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए ओरण की रक्षा और इसके बढ़ोतरी को लेकर आज ज्यादा जरूरत महसूस की जा रही है। धरती के बढ़ते तापमान को ओरण ही संतुलित रख सकते है। ओरण भूमि हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के रूप में मानी जाती रही है। आज इसका महत्व और बढ़ गया है। ग्लोबल वार्मिंग और ऑक्सीजन की हो रही कमी से पार पाने में ओरण को बढ़ाना होगा। बाड़मेर जिले में ओरण को बढ़ाने में कई लोग और संस्थाएं काम कर रही है। जिले में बाड़मेर: यहां पर है ओरण बाड़मेर जिले में कल्याणपुर (नागणेच्या माता) में ४५०० बीघा पर ओरण है। वहीं ढोक -विरात्रा (वांकल माता) में १८००० बीघा भूमि पर ओरण है। जिले में कुल ४६३७४ हैक्टेयर भूमि ओरण के नाम पर है। वहीं कुल ९२६ गांवों में ओरण है। जिले में बड़ी संख्या में यह ओरण यहां के पशुधन के संरक्षण के साथ सांस्कृतिक विरासत व धार्मिक मान्यताओं को संजोकर रखे हुए है। ओरण में किस तरह के है पौधे ओरण में वनस्पति के कई रूप नजर आते है। कहीं पर भी नहीं पनपने वाले पौधे यहां ओरण भूमि पर है। इसमें औषध की पौध भी बड़ी संख्या में मिलती है। वहीं अन्य पौधों की बहु...

भारत-पाक के पंछी एक साथ आकर पिएंगे यहां पानी

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बीएसएफ ने परींडे लगाने का अभियान प्रारंभ कर दिया परिंदे बचाने का संदेश फोटो समेत - पत्रिका पक्षी मित्र अभियान बाड़मेर. पक्षी और हवा इनकी कोई सरहद नहीं होती...संदेश बॉर्डर पर सोमवार को साकार हो रहा था।सीमा के पादरिया गांव में 142 वीं वाहिनी बीएसएफ ने यहां परिंदों ं के लिए परींडे लगाए और साथ ही पौधरोपण भी किया गया। समादेष्टा राजपाल सिंह ने कहा कि इन पक्षियों के लिए कोई सरहद नहीं है। बॉर्डर के इस गांव में उस पार से आने वाले परिंदे भी चोंच भरेंगे और उड़कर फिर उधर चले जाएंगे और इस ओर वाले पक्षी भी दाना-पानी चुग्गा लेकर सरहद के उस पार तक उड़ानभर लौट आएंगे। प्रकृति का यही जीवन है। उन्होंने राजस्थान पत्रिका का आभार व्यक्त किया कि सरहद पर यह कार्य करने को प्रेरित किया। परींडे लगाने से पहले राजपाल ने कहा कि पौधे लगाना बेहद जरूरी है। पक्षियों के घर नहीं हुआ करते है, उनको पेड़ लगाकर घर दें। इन्हीं पौधों के पेड़ बनने पर इनको छांव मिलेगी और यहीं लगे परींडे इनके पानी का प्रबंध होंगे। ये पक्षी प्रकृति का अनुपम तोहफा है, इन्हें जिंदा रखना है तो सबको एक साथ संकल्प लेना होगा। पौधे वितरित किए यहां...

क्या हो गया ऐसा बदलाव कि मालामाल हो गए ये गांव?

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बाड़मेर. रोजगार की फसल...यह भला क्या है? वो भी रेगिस्तान में जहां लोग सालों तक काम धंधा पाने के लिए पलायन होता रहा और दुबई तक रोजी रोटी की तलाश में गए है। असल में यह नया रेगिस्तान है जहां गांवों में आए बड़े प्रोजेक्ट ने यहां रोजगार की संभावनाओं को बढ़ा दिया। प्रदेशभर ही नहीं देश-विदेश से यहां आकर लोग अब नौकरी कर रहे है।तेल क्षेत्र में बाड़मेर में आस्ट्रेलिया, इंग्लैण्ड, स्कॉटलैण्ड, कनाडा से जुड़े लोगों सहित देशभर के तेल क्षेत्र के लोग यहां छोटे-छोटे गांवों में पहुंचकर कायज़् कर रहे है और इनके साथ पूरी टीम है। इस क्षेत्र में आए लोगों के पैकेज भी 6 लाख से एक करोड़ के पार तक के है। गांव-पचपदरा प्रोजेेक्ट-रिफाइनरी लागत-43129 करोड़ 18 जनवरी 2018 से कायज़् प्रारंभ हुआ है और यहां पर रिफाइनरी पर 15 हजार करोड़ रुपए व्यय हो गए है। गांव की तस्वीर ही बदल गई है। दो हजार से अधिक दुकानें, 50 से अधिक होटल और अन्य प्रतिष्ठान खड़े हो गए है। यहां मकानों का किराया 40 से 50 हजार रुपए मासिक मिल रहा है और जमीनों की कीमत आसमान छू रही है। 20 हजार लोग रिफाइनरी में कायज़् कर रहे है। प्रदेश के सबसे मेगा प्...

तड़पा देगा 48 से भी ऊपर जाने लगा जब पारा....समाधान है

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बाड़मेर पत्रिका. कोरोना में ऑक्सीजन की कमी और अब तापमान 48 डिग्री तक पहुंचना रेगिस्तान के धोरों के लिए बहुत ही संकट रहा है। जमीन के भीतर से तेल निकालने और अवैध खनन के साथ ही धरातल पर विकास के नाम पर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई और पहाडिय़ों का नष्ट होना, नदियों में पानी की कमी, तालाबों का कम उपयोग, ओरण-गोचर पर संकट ने बाड़मेर जिले में के लिए आने वाले समय में ग्लोबल वार्मिंग का संकट तो खड़ा किया है। जरूरी है कि अब बाड़मेर को ऑक्सीजोन बनाने की ओर कदम बढ़े और जो कंपनियां यहां पेड़ों की बलि चढ़ाकर विकास की गति बढ़ाने का दावा कर रही है उनसे ही हर्जाने के रूप में अब ऑक्सीजॉन लिया जाए ताकि बाद में पछतावा न हों। क्या है ऑक्सीजॉन शहरों के पास में 50 से 60 एकड़ जमीन का ऐसा इलाका निर्धारित करना है जहां अंतरर्राष्ट्रीय मानक से ज्यादा पेड़ लगाए जाए। पीपल, नीम, अशोक बरगद, जामुन के पेड़ जो अत्यधिक ऑक्सीजन देते है इनको प्रचुर मात्रा में लगाकर इतना सघन किया जाए कि यहां गुजरने वाले को अहसास हों कि वह पेड़ों के बीच में है। साथ ही इसमें पानी, छोटी नहर और विज्ञान का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए बॉट...

जन्म से पहले पिता का उठा साया, दादा ने बताई शिक्षा की महत्ता, पहले प्रयास में बनी शि क्षिका

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दिलीप दवे बाड़मेर. जिस बच्ची के जन्म से पहले ही पिता का साया उठ गया और एक साल बाद मां का भी साथ छूट गया। गरीबी के बीच बिना माता-पिता की संतान को दादा-दादी ने पाला और शिक्षा की महत्ता बताते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। आज वह बालिका शि क्षिका के रूप में चयनित होकर गांव वालों के लिए मिसाल बन गई है। तृतीय श्रेणी अध्यापक में चयनित हुई डूडियों की ढाणी निवासी हीरो मेगवाल ने सामान्य श्रेणी से वरीयता प्राप्त कर शिक्षक की नौकरी प्राप्त की है। रावतसर निवासी हीरोंदेवी मेघवाल पर बचपन से ही दुखों का पहाड़ टूट गया। उसके जन्म से दो माह पहले पिता क साया उठ गया। एक साल बाद मां ने उसको दादा-दादी के भरोसे छोड़ दिया। मजदूरी व खेती बाड़ी करने वाले दादा भूराराम व पेंपोदेवी ने हीरोंदेवी व उसकी बहन का लालन-पोषण करने के साथ शिक्षा का महत्व समझाते हुए पढ़ने भेजा। बड़ी बहन ने बारहवीं उत्तीर्ण की तो हीरोंदेवी भी पढ़ने में मन ल गाने लगी। उसने बारहवीं तक की शिक्षा रावतसर के सरकारी विद्यालयों में की। इसके बाद बीएसटीसी की तैयारी में जुट गई। पहले प्रयास में सफलता हाथ नहीं लगी तो थोड़ी निराश हुई पर हिम्मत नहीं हा...

कम्पीटिशन एग्जाम या बच्चों की है ये परीक्षा, रविवार को पेपर

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बाड़मेर. आठवीं बोर्ड की परीक्षाएं रविवार से शुरू हो गई। यह पहला अवसर है कि बोर्ड की परीक्षाएं रविवार को हुई है। इस बीच आठवीं बोर्ड के कुछ पेपर आगे भी रविवार को होंगे। परीक्षाओं का लम्बा शैड्यूल अभिभावकों और बच्चों दोनों पर भारी पड़ रहा है, क्योंकि आखिरी पेपर 17 मई को होगा। पूरे एक महीने तक परीक्षा का माहौल रहेगा। परीक्षा के दौरान यह भी पहला प्रयोग है जब बच्चों को पेपर नहीं मिला और पेपर बुकलेट में ही प्रश्नों के उत्तर लिखवाए गए। ऐसे में बच्चे पेपर नहीं मिलने से काफी मायूस दिखे। हालांकि पेपर काफी आसान आया था। परीक्षा देने के बाद बच्चे खुश थे। एक महीने का लम्बा शैड्यूल परीक्षार्थियों और अभिभावकों के लिए आठवीं परीक्षा का एक महीने का लम्बा शैड्यूल परेशानी पैदा कर रहा है। अप्रेल 17 से शुरू हुई परीक्षा पूरे एक महीने बाद 17 मई को खत्म होगी। इस बीच तीन रविवार को भी पेपर देने जाना है। शिक्षा विभाग ने आनन-फानन में ऐसा टाइम टेबल तैयार किया है, जिससे अभिभावकों के गर्मी में घूमने जाने के प्लान फेल हो गए। विभाग के अधिकारियों ने यह टाइम टेबल दूसरी बार बनाया है, जिसमें 1 व 8 मई रविवार को भी परीक्षा...

गोलगप्पे बेचने वाले ने दिया गौशाला में एक लाख का दान, हर कोई रह गया दंग

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सिणधरी(बाड़मेर)। अपना नाम करने के लिए हर कोई दान देता है, लेकिन यहां पर ठेला लगाकर गोलगप्पे बेचने वाले ने अपने रोजाना कमाई से दिल खोलकर गौशाला में दान देने का अनोखा नजारा सामने आया। सिणधरी मुख्य कस्बे के मेला मैदान में एक शाम गौ माता के नाम विशाल भजन संध्या का आयोजन एक अप्रेल को किया गया था, उस दौरान गौशाला में दान देने को लेकर बोलियां लग रही थी तब ठेला लगाकर गोलगप्पा बेचने वाले व्यक्ति ने एक लाख एक हजार की बोली लगाते हुए अपनी पुणे कमाई में गौशाला में दान दिया। जिसको देखकर हर कोई दंग रह गया। गोलगप्पे वाले ने केवल अपनी नियमित गाड़ी कमाई से गौ माता की सेवा के लिए गौशाला में दान दिया। गोलगप्पे बेच कर एक दिन में होने वाली गले की राशि भी दान दान देने वाले हर कोई होते हैं लेकिन गोलगप्पे ठेला धारक विशनाराम पुत्र मूलाराम एक अनोखी मिसाल पेश की । एक दिवस में गले में एकत्रित होने वाली राशि बिना गिनती किए पोटकी में बांधकर गौ माता के नाम मंच पर सौंप दिया। यह भी पढ़ें : जयपुर एयरपोर्ट पर पकड़ा 16 लाख का सोना, ब्रेसलेट में मिले सोने के 64 टुकड़े, देखें वीडियो विशनाराम का प्रसिद्ध है गोलगप्पा व...

कुछ श्रमिकों का बीमार होना बाड़मेर के हजारों लोगों पर रोजाना पड़ रहा भारी

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बाड़मेर। नेहरू नगर रेलवे ओवरब्रिज पर सड़क मरम्मत कार्य के मद्देनजर वाहन एवं पैदल आवागमन 16 अप्रेल सुबह तक बन्द करने के बीच अब इसे 21 अप्रेल तक पूरी तरह आवाजाही से बंद रखा जाएगा। सार्वजनिक विभाग 10 दिनों से अधिक समय के बाद भी काम समय पर पूरा नहीं कर पाया है। जबकि विभाग के अधिकारियों ने पहले दावा करते हुए 16 अप्रेल सुबह से पुल को फिर से खोलने की बात कही थी। लेकिन अब इसे 6 दिन और बढ़ा दिया है। काम नहीं होने का विभाग का बहना समय पर काम पूरा नहीं होने का विभाग का बहना भी अजीब नजर आ रहा है। अधिकारी बताते है कि तय समय पर काम पूरा नहीं इसलिए नहीं हो पाया कि दिन में गर्मी के कारण पुल मरम्मत नहीं हुई और इस बीच श्रमिक बीमार हो गए। अब इसका खामियाजा शहर के हजारों लोगों को अगले 6 दिनों तक भुगतना पड़ेगा। लोग बोले...हम हो चुके परेशान शहर के लोगों का कहना है कि श्रमिक बीमार हो गए तो दूसरे मजदूर नहीं मिल सकते है क्या?, प्रशासन और अधिकारियों को आम लोगों की तकलीफ से कोई सरोकार नहीं दिखता है, इसलिए बहाना बनाता हुए अब फिर6 दिन और बढ़ा दिए है। शहर से आवाजाही का एकमात्र प्रमुख मार्ग अब नेहरू नगर क्रासिंग...

डंपर ने पति-पत्नी समेत बेटे को कुचला, मौके पर मौत, रक्तदान शिविर में जा रहे थे गांव

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बाड़मेर। जिले के बालोतरा में शुक्रवार को भीषण सड़क हादसा हो गया। हादसे में पति-पत्नी समेत बेटे की मौत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि मोटरसाइकिल के परखच्चे उड़ गए। हादसे की सूचना मिलने के बाद पुलिस प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने मृतकों के शव को अपने कब्जे में लेकर जिला अस्पताल की मोर्चरी में रखवा दिया। परिजनों के आने के बाद शव का पोस्टमार्टम किया जाएगा। घटना शहर के मूंगड़ा सर्किल के पास की है। थानाधिकारी प्रदीप डांगा ने बताया कि मृतक कालेवा गांव निवासी सोहनलाल (32), धर्मपत्नी गीता (24), पुत्र गर्वित (3) पचपदरा में होने वाले रक्तदान शिविर में हिस्सा लेने के लिए जा रहे थे। मूंगड़ा सर्किल के पास एक डंपर दूसरे डंपर को ओवरटेक कर रहा था। इस दौरान बाइक सवार तीनों को चपेट में ले लिया। हादसे में तीनों की मौके पर मौत हो गई। शवों को कब्जे में लेकर नाहटा अस्पताल की मॉर्चरी में रखवाया गया है। पुलिस ने डंपर को भी जब्त कर लिया है। यह भी पढ़ें : Death in road accident Video - रोड एक्सीडेंट में एक ही परिवार के नौ सदस्यों में से छह की मौत, देखें मृतकों व घायलों की सूची... यूं हुआ हादसा जान...

जागरूक अभिभावक ही सच्चे देश सेवक : वन मंत्री

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बाड़मेर । अभिभावकों का कॉलेज में आकर संवाद करना सुखद संदेश है। जागरूक अभिभावक बच्चों में नैतिक गुणों का विकास कर सच्ची देश सेवा कर सकते है। यह विचार वन एवं पर्यावरण मंत्री हेमाराम चौधरी ने राजकीय पीजी महाविद्यालय में आयोजित उजासोत्सव पराक्रम कार्यक्रम में रखें। उन्होंने कहा कि एयर रोवरिंग नई पहल है जो तारीफे काबिल है। इस अवसर पर जिला कलक्टर लोकबंधु ने कहा कि कैडेट्स ने एनसीसी के ध्येय वाक्य एकता और अनुशासन को आज यहां प्रत्यक्ष रूप से जीवंत कर दिया है। इससे पहले प्रेरणा स्थल पर शहीद प्रेम सिंह और शहीद पीराराम को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए। जयंती पर अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। रोवर रेंजर ने कलर पार्टी और एनसीसी कैडेट्स ने सेरीमोनियल गार्ड ने अतिथियों का स्वागत किया। नेशनल कैंप में भाग लेने वाले कैडेट्स और रोवर रेंजर्स को सम्मानित किया गया। सहयोगी के रुप में गणपत सिंह आसु, भाखर सिंह राजगुरु, नैनाराम जाखड़, अमेदाराम बेनीवाल, मोटाराम डूडी, प्रताप चौधरी, भरत गोदारा को सम्मानित किया। विशिष्ट सेवा गतिविधियों के लिए नरेंद्र लेगा, प्रेम परिहार, मदन बारूपाल, सत्ता राम जानी, म...

बाड़मेर में इन धार्मिक स्थलों में करें गर्मी में सैर

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बाड़मेर में इन धार्मिक स्थलों में करें गर्मी में सैर - बाड़मेर जिले में अब धार्मिक पर्यटन के लिए स्थान बनता जा रहा है। इसको लेकर गर्मियों में भी लोग पहुंचने लगे है। बाड़मेर. गर्मी की छुट्टियां बिताने की सोच रहे लोगों को सकून और तीर्थ यात्रा की इच्छा है तो बाड़मेर के पंच तीर्थ स्थल पर आकर वे अच्छा महसूस कर सकते है। साथ ही बॉर्डर की टूर की भी उनकी इच्छा पूरी हो सकती है। बाड़मेर के बालोतरा रेलवे स्टेशन पर इसके लिए उतरना होगा और बालोतरा के पास से ही उनका यह टूर प्लान शुरू हो जाता है जहां से वे तीर्थ यात्रा का योग बना सकते है। नाकोड़ा यह जैन तीर्थ है जो बालोतरा रेलवे स्टेशन से 15 किमी की दूरी पर है। यहां बालोतरा रेलवे स्टेशन से ही सुविधा मिल जाएगी। नाकोड़ा में भैरव मंदिर के साथ ही जैन मंदिर है जहां प्रतिवर्ष लाखों लोग दर्शनार्थ आते है। नाकोड़ा में ठहरने की पर्याप्त सुविधा है। पहाडिय़ों के बीच में रमणीय स्थल में सुबह-शाम सकून का अनुभव होता है। आसोतरा आसोतरा में ब्रह्मामंदिर है। यह राजपुरोहित समाज का बड़ा तीर्थ स्थल है,जहां खेताराम महाराज की समाधि भी है। बालोतरा से करीब 15 किमी दूर इस...

पंद्रह साल से फेल क्यों है यह सरकारी योजना?

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बाड़मेर पत्रिका मुख्यमंत्री कियोस्क रोजगार योजना के अंतर्गत महावीर पार्क के पीछे लगे कियोस्क कबाड़ हो गए हैं। यही हाल शहीद सर्किल के पास कृषि मण्डी के दीवार के सहारे लगे कियोस्क का भी है। रोजगार उपलब्ध करवाने की मंशा से लगाए गए ये कियोस्क अपने मालिकों की राह देख रहे हैं, लेकिन इनके मालिक व नगरपरिषद दोनों ही इन कियोस्क को भूल चुके हैं। मुख्यमंत्री कियोस्क रोजगार योजना वर्ष 2007 में अस्तित्व में आई। तत्कालीन नगरपालिका बाड़मेर ने इस योजना को गंभीरता से लिया और पूरे शहर में कियोस्क के जरिए रोजगार के लिए चार स्थानों को मुख्य रूप से चिन्हित किया। नेत्र ज्योति चिकित्सालय के सामने श्मशान घाट की दीवार के सहारे करीब पचास कियोस्क लगाए गए। इसी तरह कृषि उपज मण्डी की दीवार के सहारे 24 कियोस्क लगे। महावीर पार्क के पीछे भी करीब दो दर्जन कियोस्क रखे गए। इन तीन स्थानों पर छह गुणा छह साइज के केबिन की शक्ल के सीमेण्टेड कियोस्क रखे गए, जिसे प्राथमिकता के आधार पर हाथ ठेलाधारकों को आवंटित किया गया। इन तीन स्थानों में से केवल एक स्थान श्मशान घाट की दीवार के सहारे लगे कियोस्क ही रोजगार देने में सफल हो गए। श...

40 करोड़ का सीवरेज बना समस्या का घर, 100 करोड़ से सुधरे तो गनीमत

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फेक्ट फाइल 40 करोड़ हुए खर्च 100 करोड़ की स्वीकृति 1.50 लाख आबादी है जुड़ी हुई 10 साल से झेल रहे समस्या पत्रिका अभियान- मेरा शहर, मेरी जिम्मेवारी बाड़मेर शहर के सीवरेज सिस्टम का जिक्र आते ही जगह-जगह चॉक हो रखे नाले-नालियां, सड़कों पर बहता गंदा पानी, नगरपरिषद की मीटिंग में इस मुद्दे पर आपस में उलझते पार्षद, सिर खुजाते अधिकारी, एक के एक बाद वादे करते नेता और अंत में सिस्टम को फेल मानकर हताश हो चुके लोगों की तस्वीर खुद-ब-खुद हमारे जेहन उभर आती है। फिर सभी का एक ही राग..सीवरेज सिस्टम सुधर जाए तो शहर का हुलिया ही बदल जाए। नगरपरिषद क्षेत्र बाड़मेर में 55 वार्ड है। इनमें से एक भी वार्ड सीवरेज के आदर्श मापदण्डों पर खरा नहीं उतरता। सीवरेज के आदर्श मापदण्ड कहते है कि घर में रसोई से लेकर स्नानघर व शौचालय तक का उपभोग में लिया गया पानी व वेस्ट घर के आगे बनी नालियों में नहीं जाना चाहिए। इनका जुड़ाव घरों के बाहर गली में सीवरेज के छोटे टैंक तक सुर क्षित रूप से होना चाहिए। वहीं ये छोटे टैंक छोटी लाइन से होते हुए अंत में ट्रंक लाइन से जुड़े होने चाहिए। ट्रंक लाइन का जुड़ाव सीवरेज प्लाण्ट तक हो...

शहीदों के सर्किल की सुध, न लोगों की पीड़ा से मतलब

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पत्रिका अभियान- मेरा शहर मेरी जिम्मेवारी बाड़मेर पत्रिका. शहर का शहीद चौराहा(सिणधरी चौराहा) वो इलाका है जो अब शहर के मुख्य चौराहों में शामिल हो गया है। यहां से लेकर जैसलमेर रोड़ तक का जो दर्द है वो दूर नहीं होने से हजारों लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तीन चार विभागों की एक साथ सीमा टकराने का खामियाजा शहर के लोग भुगत रहे है। सर्किल की सुध नहीं शहीद चौराहा यहां का मुख्य है। शहीदों की याद में बने इस सर्किल को एक कोने में लाया गया है,इसके बाद से इसके आगे गंदगी का ढेर खत्म होता है न ही टूटी सड़की की समस्या। शहीदों को लेकर कार्यक्रम आयोजित करने वाली संस्थाएं इसकी सुध नहीं ले तो सालभर तक भी इसकी सफाई को तरस जाए। इस चौराहे को रंगीन लाइट और व्यवस्थित रोशनी के साथ ही सौंदर्यकरण का हिस्सा बनाया जाए तो इस शहीद सर्किल को हर कोई सैल्यूट करता नजर आए लेकिन यहां दो-पांच लाख के खर्च को लेकर बरती जा रही कंजूसी गरीमामयी माहौल को खत्म कर रही है। पुल पर हरियाली का इंतजार दिल्ली सहित बड़े शहरों में अब शहर के बीचो-बीच बने ओवरब्रिज पर हरियाली के लिए पौधों की कतारें लगा दी है और जहां पर ...

जानिए 8000 करोड़ का कैसे हुए राज्य को नुकसान

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बाड़मेर . बाड़मेर oil fielf से लगातार कम हो रहे क्रूड ऑयल उत्पादन ने राज्य सरकार को बड़ा झटका लगाया है। जनवरी 2018 से अब तक 3.50 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन हासिल होता तो राज्य के खाते में इस वित्तीय वर्ष के अंत में 12000 करोड़ रुपए होते लेकिन 4000 करोड़ पर ही संतोष करना पड़ा है। सवाल केवल इस साल का नहीं है, यह घाटा पिछले सालों व आने वालों सालों को जोड़े तो इससे भी अधिक ठहर जाता है। बाड़मेरी तेल से राज्य को मिल रहे राजस्व का आंकलन करें तो वर्ष 209-20 में 3320.10 करोड़ रुपए था और कोरोनाकाल में बड़ा झटका लगा और 2020-21 में यह 1904.79 करोड़ आ गया। इस वर्ष उत्पादन पटरी पर लौटा लेकिन वित्तीय वर्ष के अंत तक करीब 4000 करोड़ ही राजस्व मिला है। यों समझें गणित इस साल बाड़मेर के तेल का उत्पादन घटकर 1.13 लाख बैरल प्रतिदिन आ गया है जो 2018 के तय लक्ष्य के मुताबिक अब तक 3.50 लाख के करीब पहुंच जाना चाहिए था ताकि रिफाइनरी तैयार होने तक यह 5.50 लाख बैरल प्रतिदिन हों। राज्य सरकार को 3.50 लाख बैरल प्रतिदिन के उत्पादन पर मिलने वाला सालाना राजस्व करीब 12 हजार करोड़ रुपए मिल जाता लेकिन 1.13 होने से यह र...

तपती धूप मनरेगा श्रमिकों के रोजगार पर भारी

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शिव बाड़मेर. क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से सूर्यदेव ने अपना रौद्र रूप दिखाना शुरू कर दिया, ऐसे में मनरेगा में काम कर रहे मजदूरों की मुश्किलें बढ़ गई। पहले तो मशक्कत से रोजगार मिला, अब भीषण गर्मी में श्रमिकों का काम करना मुश्किल हो गया। उपखंड की 38 ग्राम पंचायतों में अभी 409 कार्यों पर तकरीबन 3400 श्रमिक महात्मा गांधी नरेगा में काम कर रहे। । वहीं जिले में पारा 44-45 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया, ऐसे में अब श्रमिकों के लिए दोपहरी के वक्त काम करना मुश्किल हो गया।श्रमिक भी मनरेगा का समय घटाने की मांग कर रहे। श्रमिकों के भीषण गर्मी में अब काम करना मुश्किल हो गया। तापमान में लगातार वृद्धि होने के साथ ही झुलसाने वाली लू के थपेड़ों में जहां कूलर भी जवाब दे रहे हो, वैसी भीषण गर्मी के बीच मनरेगा योजना के कार्यों में श्रमिकों को मिट्टी खुदाई या अन्य प्रकार के काम कर रहे हैं। काम करते हुए कुछ देर के लिए विश्राम करना भी हो तो आसपास किसी पेड़ की छांव तलाशनी पड़ती है। श्रमिक का कहना है कि पेट पालने की मजबूरी के चलते तेज गर्मी में कार्य करना पड़ रहा है। गर्मियों में होता है समय कम-जैसे ही तेज धूप के ...

खाते हो गए अवधि पार, अब तो कुछ करो सरकार

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दिलीप दवे बाड़मेर. अकाल की मार सह रहे धरतीपुत्रों को उम्मीद थी कि अल्पकालीन ऋण चुकाने में सरकार मोहलत देगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ और खाते अवधिपार हो गए। एक-दो नहीं वरन जिले के हजारों किसानों के लिए अब अवधिपार ऋण चिंता का कारण बन गया है। अकाल की मार के बीच मूल रकम चुकाने में भी जोड़ तोड़ चल रहा था तो अब ब्याज राशि देनी होगी और ऊपर से इस साल ऋण भी नहीं मिल पाएगा। ऐसे में जिले में 510 करोड़ रुपए की राशि जमा होने से रह गई जिसका सात फीसदी ब्याज चुका किसानों को जमा करवाना होगा। जिले के अधिकांश किसानों ने बाड़मेर सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक से ऋण ले रखा है। खरीफ की फसल बुवाई में किसानों को आर्थिक परेशानी नहीं झेलनी पड़े इसलिए सरकार अल्पकालीन ऋण देती है। अमूमन अप्रेल से जून के बीच तिथि तय होती है और किसानों को बैंकों के मार्फत ऋण मिल जाता है। जिसको समय पर चुकाने पर किसानों को ब्याज नहीं देना होता है और अगले साल के लिए भी आसानी से ऋण मिल जाता है। इस बार 31 मार्च ऋण चुकाने की अंतिम तिथि थी लेकिन अकाल की जिले में अकाल की िस्थति को देखते हुए गांवों में यह बात फैला दी गई कि ऋण् भरने की अंतिम तिथि डेढ़ मा...

barmer oil field बाड़मेर के क्रूड ऑयल खजाने से कम क्यों पड़ रहा तेल?

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बाड़मेर . बाड़मेर के तेल का खेल अब समझ से बाहर जाने लगा है। जहां एक ओर प्रदेश के mega project refinery के लिए 5.50 लाख बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन का लक्ष्य दिया गया है और अब तक उत्पादन 3.50 लाख बैरल प्रतिदिन हो जाना चाहिए था उल्टा स्थिति यह हो गई है कि 1.13 लाख बैरल प्रतिदिन पर आ गया है जो वर्ष 2013 के उत्पादन के मुकाबले आधा हो गया है, 2013 में 2.25 लाख बैरल प्रतिदिन को छू गया था। मुश्किल यह है कि तेल का उत्पादन यों दिनों-दिन घटता गया तो पचपदरा रिफाइनरी के लिए प्रतिदिन 5.50 लाख बैरल तेल की आपूर्ति कहां से होगी? आत्मनिर्भरत रिफाइनरी का सपना इस परिस्थिति में टूटता नजर आएगा। यों घट रहा है तेल (प्रतिदिन) 2012-13-2.25 लाख बैरल 2013-14-2.25 लाख बैरल 2016-17-2.00 लाख बैरल 2017-18- 1.75 लाख बरैल 2018-19-1.65 लाख बैरल 2019-20-1.50 लाख बैरल 2020-21-1.40 लाख बैरल 2021-22-1.13 लाख बैरल refinery की पूर्ति कैस होगी बाड़मेर में बन रही रिफाइनरी 9 मिलियन टन वार्षिक क्षमता की है। अरब आयातित तेल के अलावा बाड़मेर से 5.50 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आपूर्ति चाहिएगी। बाड़मेर के तेल अभी केवल 1.13 लाख ...

सुनो बाड़मेर की पीड़ा, जहां हाथ रखो वहां दर्द

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बल्र्ब- बाड़मेर शहर के लिए अब जहां हाथ रखो वहां दर्द की स्थितियां है। विकास की डगर पर चढ़ रहे शहर में व्यवस्थाएं बेतरतीब व अस्त व्यस्त है। सुविधाओं के नाम पर हर बार रुपया पानी की तरह खर्च होता है लेकिन फायदा उतना नहीं मिल रहा है। शहर में ऐसे कई स्थान है जिनकी समय पर सार संभाल ले ली जाए तो भी शहर के सौंदर्यकरण को चार चांद लग जाए। चौराहे, तालाब, पार्क, बस स्टेण्ड शामिल है। शहर के कोने-कोने में छोटी-छोटी समस्याओं का समय पर हल नहीं निकलने पर ये सुरसा के मुंह की तरह बड़ी होती जा रही है। प्रदेश में इस बार बाड़मेर को स्टार रैकिंग में तीसरे नंबर पर ले जाने की कवायद नगरपरिषद कर रही है लेकिन यह रैकिंग धरातल पर भी नजर आनी चाहिए। पत्रिका का अभियान आम शहरी को जोड़ते हुए बाड़मेर शहर में विकास की असली तस्वीर उतारने का प्रयास करेगा। रतन दवे बाड़मेर पत्रिका. तेल-गैस और खनिज पदार्थ के बूते देश की आर्थिक राजधानी की ओर अग्रसर बाड़मेर जिले का मुख्यालय बाड़मेर शहर में सौंदर्यकरण, स्वच्छता और धरोहरों के संरक्षण को लेकर दावे भले ही खूब किए जाए लेकिन हकीकत अलग है। नगरपरिषद ने गाहे-ब-गाहे चौराहे, तालाब और ...