बारह साल कागजों में रही योजना, अब बजट दिया फिर भी नहीं बने आदर्श गांव!
बाड़मेर. प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना लागू होने के बारह साल बीतने के बावजूद भी गांवों में बजट के अभाव में महज दिखावा बनकर रह गई है। सीमावर्ती बाड़मेर जिले में योजना लागू होने के आठ साल बाद प्रोजेक्ट के तहत गांवों का चयन किया गया। योजना के तहत अभी तक कोई काम शुरू नहीं हुए है। ऐसे में अनुसूचित जाति बाहुल्य के गांवों की तस्वीर बदल नहीं पाई है। वर्ष- 2009 में योजना लागू होने के बाद बाड़मेर में वर्ष- 2018 में सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से पीएमएजीवाई योजना के तहत बाड़मेर जिले के 95 गांवों का चयन किया गया। उसके बाद ग्राम व जिला स्तर की समिति से 74 गांवों का अनुमोदन हुआ। योजना के तहत विभाग ने 36 गांव विकास योजना (वीडीपी) तैयार कर सरकार को भेजी। राज्य सरकार ने सात माह पूर्व बाड़मेर जिले के लिए 7 करोड़ 20 लाख रुपए का बजट जारी किया, लेकिन अब तक महज 15 चयनित ग्राम पंचायतों के खातों में बजट पहुंचा है। ऐसी स्थिति में गांवों का विकास अधरझूल है। चयनित प्रत्येक गांव को विकास के लिए 20 लाख रुपए तक बजट प्रस्तावित है। ग्राम पंचायत नहीं दिखा रही रुचि प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत केन्...