इस दिवाली बाड़मेर में चलेंगे ग्रीन पटाखे, माहौल में बिखरेगी खुशबू

बाड़मेर. कोविड के कारण पिछली बार दिवाली पर पटाखे चलाने पर रोक लगी थी। हालांकि इस बार भी आदेश जा चुके थे कि पटाखें नहीं चला सकते हैं और कोरोना के कारण प्रतिबंध रहेगा। इस बीच सरकार ने ग्रीन पटाखे चलाने की अनुमति दी है। हालांकि यह भी केवल दो घंटे के लिए मिली है, जो रात को 8 से 10 बजे तक दिवाली पर होगी। बच्चे पटाखे चलाने को लेकर उत्सुक है और इस बार केवल ग्रीन पटाखे चलेंगे। वहीं होलसेल और खुदरा व्यापारी भी खुश है कि इस बार पटाखे चलाने की अनुमति मिली है।
बाड़मेर जिले में भी ग्रीन पटाखों के बाजार सजाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। जिले में बाड़मेर शहर सहित बालोतरा व जहां पर ज्यादा भीड़-भाड़ रहती है ऐसे स्थानों पर पटाखा बाजार लगाए जाएंगे। बाड़मेर में स्थानीय निकाय की ओर से लॉटरी निकलाते हुए ग्रीन पटाखों के लिए लाइसेंस जारी किए जाएंगे। पटाखा बाजार शहर के आदर्श स्टेडियम में लगेगा। जहां पर कुल 50 दुकानें लगेंगी। इसके लिए लाटरी के आवेदन 25 अक्टूबर तक होंगे।
क्या है ग्रीन पटाखे, कैस सामान्य से अलग
ग्रीन पटाखे कई मायानों में सामान्य चलाए जाने वाले क्रेकर्स से अलग है। राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (नीरी) ने ग्रीन पटाखों की खोज की थी। हालांकि आवाज से लेकर दिखने तक पारंपरिक पटाखों जैसे ही होते हैं पर इनके जलने से कम प्रदूषण होता है। दूसरे पटाखों से तुलना करने पर करीब 50 फीसदी तक कम हानिकारक गैस पैदा करते हैं। इसके कारण प्रदूषण फैलने की संभावना नहीं रहेगी।
कैसे करें ग्रीन पटाखों की पहचान
सामान्य पटाखों पर कभी भी क्यूआर कोड नहीं रहा है। लेकिन ग्रीन पटाखों की विशेषता होगी कि इनकी पहचान क्यूआर कोड करवाएगा। इसेे मोबाइल से स्कैन करते ही पता चल जाएगा कि यह कहां और किसने बनाया है। इसलिए खरीदने से पहले मोबाइल से क्यूआर कोड से भी जांच की जा सकती है।
चार तरह के होते हैं ग्रीन पटाखें, यह है खासियत
1. सेफवाटर रिलीजर : इस श्रेणी के पटाखों के जलने के बाद पानी के कण पैदा होते हैं। जिसमें सल्फर और नाइट्रोजन के कण घुल जाते हैं। नीरी ने इसे सेफवाटर रिलीजर नाम दिया। पानी प्रदूषण को कम करने का बेहतरीन तरीका माना जाता है।
2.सेफल पटाखे: इनमें पटाखों के मुकाबले 60 प्रतिशत तक कम एल्यूमीनियम का इस्तेमाल होता है। संस्थान ने सेफ़ मिनिमल एल्यूमीनियम यानी सेफल पटाखों का नाम दिया गया है।
3.स्टार क्रेकर्स: स्टार क्रेकसर्स फुल फार्म सेफ थर्माइट क्रेकर्स है। इसमें ऑक्सीडाइजिंग ऐजेंट का उपयोग किया गया है। जिसके कारण जलने पर सल्फर और नाइट्रोजन कम मात्रा में पैदा होती है। पटााखें में ख़ास केमिकल का उपयोग होता है।
4. अरोमा क्रेकर्स: ये पटाखे जलाने पर माहौल में खुशबू भरेंगे। इसके कारण इनका नाम अरोमा पटाखे रखा गया है। पटाखों को जलाने पर हानिकारक गैस कम पैदा होगी और खुशबू भी फैलाएंगे।



source https://www.patrika.com/barmer-news/green-crackers-7141330/

Comments

Popular posts from this blog

BARMER#बारहवीं में हो गए थे फेल, मेहनत के बल पर बने असिस्टेंट प्रोफेसर

BARMER#रेड से ऑरेंज जोन में बाड़मेर, हर घर नल कनेक्शन की दिल्ली अभी दूर

BARMER#जीएसएस में अतिरिक्त ट्रांसफार्मर की मांग को लेकर धरना जारी