सुनहरी धरा में शहद की संभावना भरपूर, मधुमक्खी पालन अभी भी दूर-
दिलीप दवे बाड़मेर. रेतीली धरा थार में शहद उत्पादन की भी विपुल संभावना है। करीब बीस लाख हैक्टेयर में लहलहा रही फसलों के बीच बी बॉक्स लगा दिए जाए तो किसानों को अतिरिक्त आय हो सकती है। जरूरत है तो वृहद स्तर पर मधुमक्खी पालन को अपनाने की।
जिले में करीब सवा लाख किसान खेती कर रहे हैं, लेकिन शहद उत्पादन करने वाले किसानों की संख्या मात्र दो-चार ही है।
बाडमेर जिला कृषि में नवाचार को लेकर आगे बढ़ रहा है। नई-नई फसलों के साथ कृषि आधारित उद्योग-धंधे भी फल फूल रहे हैं। मुर्गीपालन, बकरी पालन, डेयरी सहित कई कार्य हो रहे हैं, लेकिन आसानी से होने वाला मधुमक्ख्ी पालन अभी भी थार से दूर है।
हालांकि जिले में करीब सोलह लाख हैक्टेयर में खरीफ की बुवाई होती है जिसमें मूंग, मोठ, तिल, बाजरा, ग्वार आदि प्रमुख है तो करीब साढ़े तीन लाख हैक्टेयर में रबी की बुवाई। रबी में जीरा, ईसबगोल, अरण्डी, सरसों, गेहूं आदि प्रमुख है। इन फसलों में परागण की प्रक्रिया होती है जिसमें मधुमक्खी, तितली आदि प्रमुख है। वहीं,बागवानी व सब्जियों का उत्पादन भी करीब बीस हजार हैक्टेयर में हो रहा है। तीन-चार जगह ही बी बॉक्स से शहद का उत्पादन- जिले में मधुमक्खी पालन को अभी तक किसानों ने नहीं अपनाया है।
जिले में बुड़ीवाड़ा, जागसा गांव में तीन-चार किसान ही है जो अनार की फसलों के बीच बी बॉक्स रख कर शहद का उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। जबकि यहां हर खेत में बी बॉक्स लगा कर शहद का उत्पादन किया जा सकता है।
शहद के साथ फसलों को भी फायदा- बी बॉक्स लगाने पर किसान को हर साल एक बॉक्स से दस-बारह हजार रुपए की अतिरिक्त आय हो सकती है। वहीं, फसलों के परागण में मधुमक्खियां के चलते बड़ा फायदा हो सकता है। गौरतलब है कि मधुमक्खियां शहद उत्पादन के लिए एक पौधे से दूसरे पर जाती है तो वे परागण साथ ले जाती है, जिससे पौधों पर फूल व फल लगने का फायदा होता है।
बी बॉक्स लगा ले सकते हैं फायदा- मधुमक्खी पालन जिले के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। अभी कुछ किसान ही इसे अपना रहे हैं। अधिकांश किसान अपने खेतों में बी बॉक्स लगा फायदा उठा सकते हैं।- डॉ. प्रदीप पगारिया, कृषि वेज्ञानिक, केवीके गुड़ामालानी
source https://www.patrika.com/barmer-news/possibility-of-honey-in-golden-stream-beekeeping-is-still-far-6855546/
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