श्रमिक कल्याण में राज्य सरकार के छूट रहे पसीने

श्रमिक कल्याण में राज्य सरकार के छूट रहे पसीने
- उपकर से आ रहे 600 करोड़, योजनाएं मांग रही 2000 करोड़
रतन दवे
बाड़मेर पत्रिका.
प्रदेश के लाखों श्रमिकों के कल्याण के लिए बनी एक दर्जन से अधिक योजनाओं में मजदूरों को लाभ देने में सरकार के पसीने छूट रहे है। इन योजनाओं के लिए बजट को उपकर का प्रावधान है,जिससे मिलने वाली राशि पर योजनाएं चल रही है लेकिन इसमें सरकार को सालाना 600 करोड़ के करीब मिल रहे है और श्रमिक कल्याण योजनाओं को अब 2000 करोड़ से अधिक की राशि की दरकार है। राशि का इंतजाम नहीं हो पाने का नतीजा है कि योजनाओं में लाखों आवेदन लंबित चल रहे है और अधिकतम लाभ की बजाय अब तो अधिकतम निरस्त की स्थितियां होने लगी है।
प्रदेश में श्रमिक निर्माण श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा, बेटियों की शादी,स्वरोजगार, दुर्घटना में घायल, मृत्यु, सिलिकोसिस पीडि़त, टूल एवं किट, गंभीर बीमारी पुनर्भरण, प्रसूति सहायता सहित दर्जनभर योजनाएं तो है लेकिन इन योजनाओं का बुरा हश्र यह है कि आवेदन में निरस्त और लंबित का आंकड़ा 50 फीसदी से अधिक हो रहा है। छात्रवृत्ति योजना में तो 2016 से अब तक 15 लाख आवेदन निरस्त व लंबित पड़े है, सहायता महज 07 लाख को मिली। यही हाल शुभशक्ति के भी है और अन्य में भी।
श्रम मंत्री सुखराम विश्नोई से बात-
पत्रिका- प्रदेश में श्रम कल्याण की योजनाओं को लेकर क्या स्थिति है?
मंत्री- श्रम कल्याण योजनाओं को लेकर स्थिति बेहतर है और विभाग की ओर से मॉनीटरिंग करवा रहे है।
पत्रिका- लाखों आवेदन निरस्त हुए है और लंबित पड़े है, फिर कैसे स्थिति ठीक है?
मंत्री- कितने आवेदन निरस्त और लंबित है,इसकी पूरी जानकारी लूंगा। इसकी जांच करवाई जाएगी। ऐसे आवेदन जो नियमों में नहीं है,उनको निरस्त किया गया है। नियमों में है और लंबित है तो निर्देश दिए जाएंगे।
पत्रिका- छात्रवृत्ति योजना में प्रदेश में 15 लाख के करीब आवेदन निरस्त व लंबित है, यह बड़ा आंकड़ा नहीं है?
मंत्री- छात्रवृत्ति योजना के आवेदनों की जांच करवाकर इनको निस्तारित करने के निर्देश दिए हुए है। पंद्रह लाख के आंकड़े की जानकारी नहीं है।
पत्रिका- शुभशक्ति योजना में आवेदन बहुत लंबित पड़े है, यह निस्तारित क्यों नहीं हो रहे है?
मंत्री- शुभशक्ति योजना में बजट नहीं है। ऐसी कुछ योजनाएं है जिनमें बजट की कमी है। इसके लिए प्रयास किए जा रहे है।
पत्रिका- बजट को लेकर क्या परेशानी आ रही है?
मंत्री- उपकर से 700 करोड़ के करीब राशि आ रही है, जबकि योजनाओं को लेकर 2300 करोड़ रुपए की जरूरत रहती है। केन्द्र सरकार की ओर से पूरी मदद नहीं मिल रही है। इसको लेकर मुख्यमंत्री से बात हुई थी, उन्होंने आवश्वस्त किया है कि राज्य सरकार मदद करेगी।
उपकर से संग्रह की स्थिति
2010-11-85.52 करोड़
2011-12-154.01 करोड़
2012-13- 173.83 करोड़
2013-14-251.95 करोड़
2014-15-278.75 करोड़
2015-16-322.45 करोड़
2016-17-338.60 करोड़
2017-18-382.60 करोड़
2018-19-412.85 करोड़
2019-20-367.55 करोड़
2020-21-500.87 करोड़
2021-22313.97 करोड़
कुल-3925.59 करोड़



source https://www.patrika.com/barmer-news/the-state-government-is-sweating-in-labor-welfare-7910299/

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