साढ़े तीन लाख छात्राएं कर रही पैदल सफर, आधे सत्र बाद भी नहीं मिली साइकिलें
दिलीप दवे बाड़मेर. प्रदेश की नौवीं कक्षा की करीब साढ़े तीन लाख छात्राएं आधे सत्र से साइकिल का इंतजार कर रही है। योजना के तहत अब तक साइकिल नहीं मिलने पर पैदल स्कूल जाने को मजबूर है। हालांकि राज्य में पहली बार 9वीं कक्षा की छात्राओं को अपनी पसंद की साइकिल खरीदने का मौका दिया है, लेकिन अब तक साइकिलें नहीं मिली है। मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के तहत इस बार साइकिल वितरण योजना में बदलाव किया गया है। राज्य की स्कूलों में पढ़ने वाली 9वीं कक्षा की करीब 3.50 लाख छात्राओं को साइकिलों का निशुल्क वितरण किया जाना है। छात्राओं को छूट दी गई है कि वे अपनी पसंद की साइकिल ले सकेंगी। इसके लिए छात्राओं को ई वॉलेट दिया जाएगा, जिसे कंपनी के शोरूम पर देना होगा। कंपनी को पेमेंट बैंक से हो जाएगा। यदि किसी छात्रा को सरकार की ओर से तय से ऊंची दर वाली साइकिल पसंद है तो बढ़ी हुई रकम छात्रा को देनी होगी।
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राज्य सरकार ने ईडब्ल्यूएस वर्ग की कक्षा 6 से 8 तक की छात्राओं को भी निशुल्क साइकिल देने की घोषणा की है। राज्यभर में इस वर्ग की 60 प्रतिशत से अधिक अंक लाने वाली 5800 छात्राओं को लाभांवित करने का लक्ष्य रखा गया है। शर्त ये है कि उनके माता-पिता की वार्षिक आय एक लाख से कम होनी चाहिए। आवेदन ऑन लाइन करना होगा। हालांकि 9वीं कक्षा की छात्राओं को साइकिल वितरण का पैटर्न बदलने से इनका मामला भी अटक गया है।
सरकार की ओर से निर्धारित दर का ही होगा भुगतान
सरकार की ओर से केवल निर्धारित दर का ही भुगतान होगा। दरअसल जुलाई में इसके टेंडर जारी होकर सितंबर से वितरण का काम शुरू हो जाता था, लेकिन माध्यमिक शिक्षा निदेशालय के अधिकारी नियमों में बदलाव को लेकर असमंजस में हैं। एक टेंडर जारी किया था, लेकिन पिछले महीने निरस्त हो गया। बताया जाता है कंपनियों ने टेंडर शर्तों को पूरी तरह स्पष्ट करने को कहा है। प्रति साइकिल की कीमत 3500-4000 रुपए अनुमानित होने पर साल का बजट करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपए तक बैठता है।
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370 ब्लॉक मुख्यालय पर खोलने होंगे शो रूम
साइकिलों की आपूर्ति सीधे ब्लॉक स्तर पर होगी। इसके लिए कंपनी को राज्य के 370 ब्लॉक मुख्यालयों पर अपने अस्थायी शो रूम खोलने होंगे, जहां छात्राएं खुद जाकर अपनी पसंद की साइकिल ले सकेंगी। कंपनी को साइकिल का भुगतान सीधे बैंक से होगा।
छात्राओं को स्कूल आने-जाने के लिए साइकिल योजना शुरू की गई है। शिक्षण सत्र शुरू होते ही साइकिल दी जानी चाहिए। जिससे छात्राएं उसका सदुपयोग कर स्कूल आ जा सके। अभी भी अतिशीघ्र टेंडर प्रक्रिया करके अर्द्धवार्षिक से पहले साईकिलें देनी चाहिए। — बसंत कुमार जाणी, जिलाध्यक्ष, राजस्थान वरिष्ठ शिक्षक संघ, रेस्टा
अभी तक नहीं आई साइकिलें- अभी तक जिले में साइकिलें नहीं आई है। साइकिलों को लेकर उच्च स्तर से सूचना मांगने पर भिजवा दी जाएगी। - राजन शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक शिक्षा बाड़मेर
source https://www.patrika.com/barmer-news/three-and-a-half-lakh-girl-students-are-traveling-on-foot-7866373/
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