गोकाष्ट से शव का अंतिम संस्कार

बाड़मेर पत्रिका
पर्यांवरण को बचाने के लिए बाड़मेर श्मशान विकास समिति की ओर से अनूठी पहल की जा रही है। यहां अब पेड़ों की लकड़ी से अंतिम संस्कार की बजाय गाय के गोबर से बनी गोकाष्ट से अंतिम संस्कार किया जा रहा है। ऐसे में जहां गाय का महत्व बढ़ जाएगा तो दूसरी और सड़कों व गोशालाओं में गोबर का समुचित उपयोग होगा।
जीवंत हुई अंतिम संस्कार की परम्परा
वर्तमान में मोक्षधाम में पेड़ों की लकड़ी से शव का अंतिम संस्कार किया जाता है। इसके बाद संस्थान की ओर से निकटवर्ती निम्बड़ी स्थित भगवती गोशाला में बन रही गो काष्ट मंगवाई गई।
गोकाष्ट लकड़ी से होगा यह फायदा
गोकाष्ट लकड़ी का उपयोग होने से पेड़ों की लकड़ी का कम उपयोग होगा जिससे पेड़ सुरक्षित रहेंगे। इससे गाय का महत्व बढऩे के साथ गोबर का का उपयोग होगा। गोबर जलने से पर्यावरण शुद्ध होगा। इससे आसपास का वातावरण शुद्ध होगा। इससे बड़ी बात यह है कि एक शव के अंतिम संस्कार में 4-5 क्विंटल लकड़ी का उपयोग होता है गोकाष्ट में यह कार्य लगभग 3 से 3.50 क्विंटल में हो जाता है। ऐसे में एक अंतिम संस्कार से एक साथ दो पेड़ों को बचाया जा सकता है।
लकड़ी से सस्ती मिलेगी गोकाष्ट
सार्वजनिक मोक्षधाम में पेड़ों की लकड़ी 6.50 रूपए किलो मिलती है। जबकि गोकाष्ट की लकड़ी 5 रूपए किलो मिलेगी।
धार्मिक महत्व में गोबर का स्थान
गाय के गोबर का धार्मिक महत्व भी है। इसको लेकर भगवती गोशाला में गोकाष्ट का प्लांट लगाया है। सार्वजनिक मोक्षधाम में 2 गाड़ी भेजी है। दाह संस्कार में गोकाष्ट का प्रयोग होने से पर्यावरण शुद्ध होने के साथ पेड़ भी बचेंगे।
- ओमप्रकाश मेहता अध्यक्ष भगवती गोशाला निम्बड़ी
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गाय की मता बढ़ेगी
गोकाष्ठ जहां पर्यावरण बचाने में सहायक सिद्ध हो रही है तो दूसरी तरफ गाय का महत्व बढ़ेगा। जन सहयोग से मोक्षधाम में इस प्रकार का कार्य शुरू किया जाए तो आमजन को राहत मिलेगी। यह सर्व हितेषी कार्य है।
भैरूसिंह फुलवारिया संयोजक श्मशान विकास समिति
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गोशालाओं से मांगेगे जन सहयोग
नगर परिषद की ओर से संचालित नंदी गोशाला व अन्य गोशालाओं में एकत्रित गोबर का समूचित उपयोग हो सके इसके लिए बाड़मेर विधायक से सहयोग मांगा जाएगा। यह पर्यावरण बचाने की अनूठी पहल है।
- भवानीसिंह शेखावत मुख्य व्यवस्थापक श्मशान विकास समिति



source https://www.patrika.com/barmer-news/funeral-procession-from-gokashta-6512752/

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