रेगिस्तान में किसानों ने कैसे किया कमाल, फसल धमाल

तीन साल अकाल बाद बंपर सुकाल..
काचर..बोर मतीरा मीठा, दिवाली रा दीवा दीठा...
बाड़मेर पत्रिका.
रम्मक-झम्मक दिपावली नाच रही है। 55 लाख पशुधन के लिए चारा और पानी की फिक्र नहीं है। धान से घर के कोठारे भरे है। काचर-बोर मतीरों की भरपूर उपज नेे लक्ष्मी की पूजन की खुशियों को चौगुना कर दिया है। केर-सांगरी की उपज भी खूब हुई है। अनार ने निहाल किया है तो इधर अब खजूर व औषधीय पौधों की उम्मीदें दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ रही है। रेगिस्तान में दिपावली दर दिपावली खेती को लेकर बढ़ रहे रुझान और उम्मीदों ने धरतीपुत्रों के घर धन-धान्य से भरपूर किए है। इस साल आठ अरब की खरीफ ले चुका किसान 22 अरब की रबी के लिए तैयार है। नर्मदा नहर का इलाका सरसब्ज है और इंदिरा गांधी नहर व नर्मदा के शेष काम को सरकार पूरा करती है तो रेगिस्तान के किसानों के घर दिपावली की खुशियां पीढिय़ों तक मुस्कराती नजर आएगी।
कैसे आया बदलाव
- 2006 की कवास की बाढ़ और भूगर्भीय परिवर्तन ने यहां खेती-किसानी को बढ़ाया
- सुप्त पड़ी सरस्वती नदी के पदचिन्हों पर पानी की उपलब्धता लगातार बढ़ रही है
- 5500 कृषि कुएं किसानों ने तैयार करवाए, उनकी उम्मीद ने प्रतिफल दिया
- कवास की बाढ़ और उसके बाद में बारिश बढऩे से जमीन हुई रिचार्ज
- आधुनिक हुई खेती में किसान ने नवाचार किए, अनार और खजूर इसके उदाहरण है
यह है ताजा आंकलन
खरीफ- 8 अरब
रबी- 22 अरब
अनार- 135 करोड़
औषधीय पौधे-15 करोड़
सब्जियां और अन्य- 5 करोड़
काचर-बोर-मतीरा-1.50 करोड़
केर-सांगरी-1.25 करोड़
कृषि कुएं- 5500
सिंचित क्षेत्र- 3 लाख 12 हजार हैक्टयर
असिंचित क्षेत्र- 15 लाख हैक्टयर
रबी से जुड़े किसान-1 लाख किसान
खरीफ से जुड़े- 5 लाख किसान
सरकार से यह चाहिए अब मदद
- जीरा मण्डी बाड़मेर में खुले ताकि बाड़मेर के जीरे का मिले लाभ
- थार अनार की किस्म तैयार होने के बाद अनार को लेकर विशेष प्रोजेक्ट की जरूरत
- खजूर की खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सब्सिडी के साथ सुविधाएं दी जाए
- रिक्त पड़े कृषि पर्यवेक्षकों के पदों को भरे जाने की दरकार है
नर्मदा का काम हों पूरा
नर्मदा नहर 2008 में बाड़मेर में आई,इसके बाद गुड़ामालानी,धोरीमन्ना और अन्य क्षेत्रों में किसान निहाल हुए है। गडरारोड़ तक इसका कार्य पूर्ण किया जाना जरूरी है ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके।- रऊफ राजा खलीफा
किसान देशसेवा का रहे
शिव-ऊण्डू और रेगिस्तानी क्षेत्र में कार्य कर रहे किसानों को अब आधुनिक कृषि से जोड़ा जाए। टिड्डी प्रकोप, रबी में पाला पडऩे पर किसानों को तत्काल मदद की जानी चाहिए। किसान उपज लेकर देशसेवा का कार्य कर रहे है।- स्वरूपसिंह ऊण्डू,किसान
किसान प्रशिक्षित हों
अनार व खजूर से जुड़े किसानों के लिए विशेष योजना लाई जाए। साथ ही आधुनिक खेती के लिए अब बाड़मेर स्तर पर विशेष कॉलेज व प्रशिक्षण हों। किसानों के बेटेे-बेटियों को खेती किसानी के लिए प्रशिक्षित किया जाए।- रणवीरसिंह भादू



source https://www.patrika.com/barmer-news/how-did-the-farmers-in-the-desert-work-wonders-6521112/

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