एंबुलेंस में ऑक्सीजन खत्म, रास्ते में ही रुक गई रैफर मरीज की सांसें

बाड़मेर. एक किशोरी की अचानक तबीयत बिगडऩे पर अस्पताल लेकर दौड़े परिजनों के लिए चिकित्सा विभाग की लापरवाही ही उसकी मौत का कारण बन गई। घटनाक्रम के अनुसार सोमवार को चौहटन तहसील के जैसार निवासी सोनाराम जाट की सत्रह वर्षीय बेटी चुकी कुमारी की अचानक ही तबीयत बिगड़ गई। जिसको उपचार के लिए उसके परिजन चौहटन अस्पताल लेकर गए। जहां से बाड़मेर रैफर कर दिया। राजकीय चिकित्सालय बाड़मेर में नाजुक हालत देखकर डॉक्टरों ने सरकारी एम्बुलेंस से जोधपुर भेज दिया।
बाड़मेर से निकलते ही उखडऩे लगी सांसें
बाड़मेर के पास उत्तरलाई से निकलने के बाद किशोरी को सांस लेने में ज्यादा परेशाानी पर परिजन सकते में आ गए तथा साथ बैठे नर्सिंग कर्मियों से उसका उपचार शुरू करने की गुहार लगाते रहे। लेकिन नर्सिंग कर्मियों ने कवास से निकलने के बाद स्वीकार किया कि इस सरकारी एम्बुलेंस की ऑक्सीजन खत्म हो चुकी है ओर तेज गति से वाहन को दौड़ा कर बायतु सीएचसी ले जाकर ऑक्सीजन लगवा देंगे। बायतु से करीब पांच किमी पहले ही ऑक्सीजन के अभाव में किशोरी का दम टूट गया। उसके बाद एम्बुलेंस को बायतु अस्पताल लाकर खड़ा किया।
एम्बुलेंस छोड़ चालक व नर्सिंगकर्मी
आरोप है कि बायतु अस्पताल परिसर में सरकारी एम्बुलेंस को खड़ा करने के बाद चालक वालाराम समेत दो अन्य नर्सिंग कमीज़् मौके से फरार हो गए। इस बीच किशोरी का शव करीब चार घंटे तक एम्बुलेंस में ही पड़ा रहा।
चालक समेत दो अन्य के खिलाफ मामला दर्ज
- मृतका के चाचा टिकमाराम पुत्र जैसाराम ने एम्बुलेंस चालक वालाराम समेत दो अन्य नर्सिंग कार्मिकों के खिलाफ गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए बायतु थाने में मामला दर्ज करवाया कि एम्बुलेंस में ऑक्सीजन नहीं होने के बावजूद भी मरीज को लेकर रवाना हुए। जिससे उनकी भतीजी को समय पर ऑक्सीजन नहीं मिल पाई। इससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने चालक समेत दो अन्य नर्सिंग स्टाफ के खिलाफ मामला दर्ज किया।
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घटना को लेकर पीएमओ डॉ. बीएल मंसूरिया से बात
- ऑक्सीजन की कमी की घटना क्या है?
घटना के तुरंत बाद मेरे पास में चालक का कॉल आया था। उसका कहना था कि एक सिलेंडर चल रहा था। बायतु से दूसरा सिलेंडर ऑक्सीजन का लेना था। बायतु पहुंचे तो वहां चिकित्सक ने कहा कि पहले से ही मृत्यु हो गई है।
-एम्बुलेंस में ऑक्सीजन व अन्य संसाधनों की जांच को कोई प्रभारी नियुक्त है?
नहीं, ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। चालक ही इसके लिए जिम्मेदार रहते हैं।
-बाड़मेर अस्पताल में कितनी है एम्बुलेंस?
अभी तीन एम्बुलेंस है और सभी ठीक है।
-इस मामले में लापरवाही किस स्तर पर हुई है?
अभी इसकी जांच नहीं हुई है, न ही कोई कार्यवाही की बात हुई है।



source https://www.patrika.com/barmer-news/barmer-govt-ambulance-6427878/

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